Gujarat Uniform Civil Code: गुजरात में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्य विधानसभा ने मार्च 2026 में गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पारित किया था। इसके बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया। केंद्र सरकार के अनुसार, गुजरात विधानसभा से UCC बिल पारित होने के साथ राज्य उत्तराखंड के बाद ऐसा करने वाला दूसरा राज्य बना। कैसे आगे बढ़ी UCC की प्रक्रिया? गुजरात में UCC की दिशा में पहल 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुई थी। इसके बाद फरवरी 2024 में राज्य सरकार ने UCC का मसौदा तैयार करने और इसकी संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञ समिति बनाई। समिति ने मार्च 2026 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी। इसके बाद विधानसभा में बिल पर लंबी चर्चा हुई और मार्च में इसे पारित कर दिया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी गुजरात विधानसभा से बिल पारित होने पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और विधायकों को बधाई दी थी। UCC लागू होने पर क्या बदल सकता है? UCC का उद्देश्य व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े कुछ मामलों में एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। गुजरात के प्रस्तावित कानून में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति अधिकारों से जुड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके तहत विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण से जुड़े नियम भी प्रस्तावित हैं। बहुविवाह पर रोक और एकविवाह व्यवस्था को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं। आदिवासी समुदाय को छूट गुजरात के UCC प्रावधानों में अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य उनके पारंपरिक सामाजिक और वैवाहिक रीति-रिवाजों को ध्यान में रखना बताया गया है। गौरतलब है कि UCC को लेकर राजनीतिक दलों और विभिन्न सामाजिक समूहों की अलग-अलग राय रही है। ऐसे में गुजरात में इसके प्रावधान और लागू होने की प्रक्रिया पर आगे भी नजर रहेगी। ये भी पढ़ें: यूपी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 15 IAS अफसरों का तबादला